सुकून अब मुकद्दर में ,
कोई शाम नहीं , किसी सहर भी नहीं
भूला दिया उसने न जाने कैसे ,
मुझमें तो ऐसा कोई हुनर भी नहीं
कोई बता दे हमें भी कत्ल करने का तरीका
कमबख्त ! जज़्बातों का कोई जहर भी नहीं ।
कोई शाम नहीं , किसी सहर भी नहीं
भूला दिया उसने न जाने कैसे ,
मुझमें तो ऐसा कोई हुनर भी नहीं
कोई बता दे हमें भी कत्ल करने का तरीका
कमबख्त ! जज़्बातों का कोई जहर भी नहीं ।
Sukun Ab Mukaddar Mein
Koi Shaam Nahin Kisi Sahar Bhi Nahin
Bhula Diyaa Usne Na Jaane Kaise
Mujhmein To Aisa Koi Hunar Bhi Nahin
Koi Bata De Hamein Bhi Katla Karne Ka Tarika
Kambakht Jazaaton Ka Koi Zahar Bhi Nahin
Comments